नए भारत का अर्थीक मंत्र: स्वदेशी

1850 से1904 तक चलेदेश का पहला स्वदेशी असभयान आज के समय मेंउतना ही प्रासिंसगक हैसजतना
आज़ादी के सिंग्राम मेंथा। बाबा राम ससिंह कूका, वह पहला नाम था , सजन्होंनेदेश मेंसबसेपहलेस्वदेशी का
सबगलु फूिंका था। उन्होंनेदेशवाससयों सेदेश मेंबनेकपडेउपयोग करनेका आग्रह सकया था ।
आज़ादी केबाद देश मेंआसथिक पक्ष को मजबूती देनेके सलए उत्पादन पर ज़ोर सदया गया। परन्तुदेश मेंगरीबी
का दष्ुचक्र था और सजसका मख्ुया कारण था देश की कम आय होना। देश मेंछोटेबाजार , छोटेउद्दोगपसत ,
गािंव-शहर को जोड़नेवालेपररवहन की कमी और अन्य ऐसेकई कारण थेसजसकी वजह सेसनवेश भी बहुत
कमी थी। उन सदनों साविजसनक क्षेत्रों मेंकाम करनेकिंपसनयों नेआसथिक मोचाि सिंभाला। देश की 85 %
जनसख्ँ या ग्रामीण क्षेत्रों मेंरहती थी और उनके आय का मख्ुय श्रोत खेती थी। उसचत सहायता के आभाव में
साविजसनक क्षेत्र अपनी क्षमता से कम सवकास में योगदान दे पाए। उसके बाद एक द र सनजीकरण
(Privatization ) का भी आया। ऐसा मान सलया गया था सक साविजसनक क्षेत्र सवफल हो गया हैऔर इसका
एकमात्र उपाय सनजीकरण ही है। फलस्वरूप 1991 मेंनई आसथिक सनसत (New Economic Policy) बनी
सजसके कारण कई सरकारी कम्पसनयों का सनजीकरण हुआ। साथ ही साथ प्रत्यक्ष सवदेशी सनवेश (Fdi ) को
भारत में(FEMA ) के अिंतगित स्वीकृसत समली। परतिं ुवैश्वीकरण के नाम पर भारत मेंजो लूट की गयी, वह हम
सभी सेसछपी नहीं है।
भारत 1995 मेंसवश्व व्यापार सिंगठन का सदस्य बना। ऐसा देखनेमेंआया हैसक सिंयक्तु राष्रसिंघ सेजडुी
सिंस्थाएिं कुछ देशों के इशारेपर काम कर रही हैं, चाहेवह सवश्व व्यापार सिंगठन हो या वतिमान सस्थसत मेंसवश्व
स्वास््य सिंगठन (WHO) । फ्री रेड/मक्तु व्यापार की वकालत करनेवालेदेश ससफि अपनेदेश के सनयाित को
प्राथसमकता देतेहैंऔर सवकासशील देशों की आसथिक गसत को हासन पहुचँ ानेका काम करतेहैं। उदाहरण के
सलए चीन नेसवश्व व्यापार सिंगठन की सदस्यता 2001 मेंप्राप्त की और टैररफ नीसत का फायदा उठाया। उन्होंने
अपनेदेश मेंउत्पादकों को बड़ी मात्रा मेंउत्पादन करनेको कहा और सनयाित पर ससससडी दनेका काम सकया ।
पररणाम स्वरुप चीन दसुनया का उत्पादन केंद्र बना गया और सवश्व के अन्य देशों मेंडिंसपगिं करना शरूु कर सदया ।
1999 मेंदो चीनी सेना के अफसरों द्वारा सलखी गयी पस्ुतक “The Unrestricted Warfare” मेंबताया गया
हैसक यसद कोई देश आसथिक रूप से, सैन्य शसक्त,तकनीसक त र पर मजबूत है, उस स्थसत मेंउसेकैसेहराया
जा सकता है। उनमेंसेएक हैजैसवक यद्धु (Biological Warfare) और उसका उदाहरण हैकोरोना वायरस।
दसुनया नेअब यह मान सलया हैसक इस वैसश्वक महामारी केपीछेचीन का ही हाथ है। इससलए मझुेइसेचीनी
वायरस कहनेमेंकोई सिंकोच नहीं है ।

इस महामारी नेन ससफि भारत को बसकक पूरेसवश्व को सपछलेचार महीनों से सहला कर रख सदया है। यसद बात
करेंभारत की , 22 माचि2020 सेही देश लॉकडाउन मेंहै। परन्तुअब ऐसा देखनेमेंआया हैसक इससेअब
कई नई परशे ासनयों नेजन्म लेसलया हैसजसमेबेरोज़गारी और पलायन मख्ुय है। अगर देखा जायेतो इस
महामारी नेहम सभी के समक्ष एक नए पहलुकी ओर रुख करनेको सववश क्र सदया हैऔर वह पहलुहै-
स्वदेशी।
इस द रान ऐसेकई दृश्य सामनेआयेसजन्हेंदेखकर ऑखिं ेंनम हो गयीं और इन सभी का मख्ुय कारण है
बेरोज़गारी और पलायन। प्रधानमत्रिं ी जी नेदेश को सम्बोसधत करतेहुए आत्मसनभिर भारत की बात बताई है।
प्रधानमत्रिं ी नेस्वदेशी आसथिक मॉडल को बल देतेहुए कहा हैसक हमेलोकल के सलए वोकल होने की
आवश्यकता है। राष्रीय स्वयिंसेवक सिंघ के आसथिक पक्ष सेजड़ुेअनसुिंगसगक सिंगठन स्वदेशी जागरण मिंच
सपछलेतीन दशकों सेस्वदेशी आसथिक मॉडल की वकालत करता रहा है। आत्मसनभिरता को यसद सरल भाषा में
समझना हो तो एक मत्रिं अवश्य ध्यान मेंरहना चासहए, “चाहत मेंदेसी, ज़रूरत मेंस्वदेशी , मजबूरी मेंसवदेशी ” l
देशी की आसथिक सस्थसत को पनुजीसवत करनेके सलए हमेंदेश मेंसनसमित उत्पादों का इस्तेमाल करना होगा
सजससेरोजगार समल सके। इस पहलुको ध्यान मेंरखतेहुए भारत सरकार ने20 लाख करोड़ का प्रावधान भी
सकया है। अकपकालीन समाधान यह हैसक देश मेंमजदूर वगि के सलए रोजगार की व्यवस्था की जाये। ऐसा
देखनेमेंआया हैकी बहुराष्रीय किंपसनयों के पास धन रासश की कोई कमी नहीं है। उन्हेंचासहए सक वेअपने
कमिचाररयों का समय सेवेतन भगुतान कर।ें इस महामारी मेंसबसेज्यादा सजसेहासन हुयी हैवह हैसूक्ष्म, लघु
और माध्यम उद्योग। इन उद्योगों केपास कायिशील पूजँ ी (Working Capital ) की कमी होनेके कारण अपने
कमिचाररयों को वेतन व रोजगार देने मेंपरशे ानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे मेंभारत सरकार ने
कोलैटरल फ्री ऋण देनेके साथ कई अन्य महत्वपूणिकदम उठायेहैं। साथ ही साथ बड़ी किंपसनयों को रोजगार
ससससडी ऋण की शतिको सामनेरख कर ऋण देना होगा।
अब समय आ गया हैसक हमें”Modernization without Westernization ” की सनसत के साथ आगेबढ़ना
होगा। देश मेंबनेउत्पादों की ब्ािंसडिंग करनी होगी चाहेवह आगरा का पेठा हो या हाथरस का गलीचा। सवदेशी
किंपसनयािं जो भारत मेंसनवेश करना चाहती हैं, उनके सामनेस्पष्ट शतिरखनेकी आवश्यकता हैवेकच्चा सामान
भारत सेखरीदें, रोजगार बढ़ाएिं , सनयाित करें, इसके असतररक्त सवदेशी मद्रुा कोष मेंभी अपना सहस्सा देंऔर
रॉयकटी या टेसननकल फीस के नाम पर पैसा बाहर न भेजें।
देशवाससयों मेंस्वदेशी के प्रसत जागसृत आयी हैऔर उसके साथ सवदेशी वस्तुमख्ुयतः चीनी वस्तओु िंका प्रयोग
न करनेका भी सिंककप सलया है। समाज मेंनई चेतना आयी हैऔर देश आत्मसनभिरता की राह पर चलतेहुए
पनुः आसथिक व समासजक मोचों को मजबूती देतेहुए सवश्वगुरु बननेकी ओर अग्रसर होगा।

Published by vijayashish

M.A Economics. UGC NET Economics.

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